राजस्थान के प्रमुख मन्दिर

मन्दिर - राजस्थान के

रणकपुर मन्दिर - पाली - राणा कुम्भा के मंत्री धराक द्वारा 1439 ई में जैन तीर्थकर आदिनाथ की चौमुखी
मूर्तिवाला मन्दिर देष का प्रथम सूर्य मन्दिर कहलाता है इसे 1444 खम्बोवाला मन्दिर कहते है, इस मन्दिर के
सामने पार्ष्वनाथ के मन्दिर में अष्लील मूर्तियों का बाहूल्य है, इसलिये इसे वेष्या का मन्दिर भी कहा जाता है।

33 करोड़ देवी देवताओगं का मन्दिर - मडोर (जोधपुर) - 33 करेाड़ देवी देवताओं की गद्दी (साल) स्थित है
पूना से इसका मुख्यालय स्थानान्तिरित हुआ है।

सचिया माता मन्दिर - ओसियां (जोधपुर) - ओसवाल समाज की कुल देवी का मन्दिर व तीर्थ स्थल

कुम्भाष्याम मंदिर - चित्तोड़गढ़ - महाराणा कुम्भा द्वारा बनाया गा षिव मंदिर बाद में इसे वैष्णव मन्दिर का
रूप दिया गया।

सतबीस देवरा - चित्तोड़गढ़ - जैन मंदिर इसमें 27 देवरियां स्थित है।

वेणेष्वर महादेव मंदिर - डूंगरपुर - इसमें 5 स्थानों से खंडित षिवलिंग है, भारत का एकमात्र मंदिर जहां
षिवलिंग की पूजा होती है। - सोम, माही, जाखम त्रिवेणी पर मेला

ऽ आथूर्णा के मंदिर - आदिवासियों का कुम्भ, बांगड़ का कुम्भ, बांगड़ के पुष्कर।

ऽ गणपति सूर्य मन्दिर - बांसवाड़ा - 11वी वंष में परमार राजाओं द्वरा निर्मित।

ऽ चारभूजा मंदिर - राजसमंद - भगवान विष्णु मंदिर

ऽ श्रीनाथ जी का मंदिर - नाथद्वारा (राजसमंद) - बनास नदी पर स्थित, वल्लभ सम्प्रदाय का प्रमुख केंद्र,
ओरंगजेब के समय 1671 ई में राजा राजसिंह द्वारा नाथ जी की र्मूिर्त वृंदावन से लाई गई, हवेली (हिन्दुस्तानी)
संगीत बजाया जाता है।

ऽ हाराकाधीष मंदिर - काकरोली (राजसमंद) 1670 में राजसिंह द्वरा निर्मित वल्लभ सम्प्रदाय का प्रमुख मंदिर।

ऽ अम्बिका देवी मंदिर - जगत (उदयपुर) - राजस्थान का खजुराहो

ऽ सास - बहू मंदिर - नागदा (उदयपुर) - यह दो संगमरमर के मंदिर है। 10वी षताब्दी में निर्मित।

ऽ जगदीष मंदिर - उदयपुर - 1651 ई में जगतसिंह द्वारा निर्मित विष्णु मंदिर

ऽ कैलाषपूरी (एक लिंग जी मंदिर) - उदयपुर - बजा रावल द्वरा निर्मित षिवजी की चौमुखी मूर्ति वाला मंदिर
उदयपुर राजाओं के कुलदेवता।

ऽ ऋषभ देव जी मंदिर - कुवैल (उदयपुर) - सम्पूर्ण भारत में ऋषभदेव जी का मंदिर ही एक ामत्र है जिसमें
जैन, आदिवासी, वेष्णव व मुस्लिम सभी समान रूप से पूजा करते है।

ऽ रणछोड़ का मंदिर - किराडू (बाड़मेर) - इतिहास, पुरातात्विक तथा आधयात्म की त्रिवेणी के नाम से
विख्यात।

ऽ मल्लीनाथ मंदिर - तिलवाड़ा (बाड़मेर) - प्रसिद्ध पषु मेला

ऽ सेना के जवानों के देवी - लनोटा (जैसलमेर) - सैना, सुरक्षा बल के जवाना द्वारा पूजा।

ऽ घंटी वाले मंदिरो का षहर - भालरापटन (झालावाड़ )-

ऽ सूर्य मंदिर भालरापटन (झालावाड़ ) सात सहेलियों का मंदिर भी कहलाता है, यह खजुराहा मंन्दिर षैली से
निर्मित है।

ऽ षीतलेष्वर महादेव मंदिर - झालावाड- राजस्थान का पहला मंदिर जिसमें तिथि अंकित है।

14 जैन मंदिरो का समूह - देरीसेरी (सिरोही) राजमहल के पास

वषिष्ठ मंदिर - सिरोही - यहां अग्निकुण्ड स्थित है जिसमें विषिष्ेठ मुनि द्वारा चार राजपूत जातियों की उत्पत्ति
का उल्लेख है।

अर्बूददिपी मंदिर - सिरोही - दुर्गा माता का मंदिर चट्टान के नीचे।

दिलवाड़ा/ जैन मंदिर - सिरोही - राज का सर्वश्रेष्ठ जैन मंदिर , 1. आदिनाथ मंदिर (विमलषाह मंदिर)
1031 ई में चालुक्य षासक भीमदेव प्रथम के मंदिर विमलषाह द्वारा 2. नेमीनाथ मंदिर (22वें तीर्थकर) 1251 ई
तेजपाल द्वारा निर्मित - 3. भामाषाह का मंदिर

विभीषण जी का मंदिर - कैथून (कोटा) - सम्पूर्ण भारत एक मात्र मंदिर, कैथून कोटा डोरिया मसूरिया के लिये
प्रसिद्ध।

ब्रहमाषी मंदिर - बारां - सम्पूर्ण विष्व में एकमात्र मंदिर जहां देवी की पीठ पूजा अर्चना की जाती है।

ऽ बाबा रामदेव मंदिर - रामदेवरा (जैसलमेर)

सुहाठा मंदिर - आमेर - षिलादेवी की मंदिर

लक्ष्मण जी मंदिर - भरतपुर

नौ ग्रहों का मंदिर - किषनगढ़ अजमेर

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