प्राचीन भारतीय इतिहास के स्रोत


धर्मग्रन्थ एवं ऐतिहासिक ग्रंथो से मिलने वाली जानकारी
Ø       भारत का सर्वप्राचीन धर्मग्रन्थ वेद है, जिनके संकलनकर्ता है - महर्षि कृष्ण द्वैपायन वेदव्यास
Ø       सबसे प्राचीन ग्रन्थ ऋग्वेद , एवं सबसे बाद का वेद अथर्ववेद है
Ø       ऋग्वेद में १० मण्डल, 1028 सूक्तो एवं 10462 श्लोको की संख्या है.
Ø       देवता सोम का उल्लेख ऋग्वेद के ९ वें मण्डल में है
Ø       वेद के श्लोको को "ऋचाएँ" कहा जाता है
Ø       वामनावतार के तीन पगों के आख्यान का प्राचीनतम स्रोत ऋग्वेद है
Ø       ऋग्वेद में इंद्र के लिय २५० व अग्नि के लिय २०० श्लोको की रचना की गयी है
Ø       गद्य एवं पद्य वाला वेद - यजुर्वेद
Ø       भारतीय संगीत का जनक - सामवेद
Ø       जादू-टोना, शाप, विवाह, प्रेम, राजकर्म, तंत्र-मंत्र आदि विविध विषयों से सम्बन्धित वेद - अथर्ववेद
Ø       सभा एवं समिति को प्रजापति की दो पुत्रियां कहा गया है - अथर्ववेद में
Ø       भारतीय ऐतिहासिक कथाओं का सबसे अच्छा विवरण मिलता है - पुराणों में
Ø       पुराणों की संख्या - 18 (रचियता - लोमहर्ष एवं उनके पुत्र उग्रश्रवा)
Ø       सबसे प्राचीन और प्रामाणिक पुराण - मत्स्य पुराण
Ø       स्मृतिग्रंथो में सबसे प्राचीन और प्रामाणिक - मनुस्मृति
Ø       बुद्ध की पुर्व्ज्न्म्की कहानी वर्णित है - जातक में
Ø       जैन साहित्य को कहा जाता है - आगम्
Ø       महावीर के जीवन-कृत्यों तथा अन्य समकालिको के साथ उनके सम्बन्धों का विवरण मिलता है - भगवतीसूत्र में
Ø       जैनधर्म का प्रारम्भिक ज्ञात होता है - कल्पसूत्र से
Ø       अर्थशास्त्र के लेखक है -चाणक्य
Ø       संस्कृत साहित्य में ऐतिहासिक घटनाओ को क्रमबद्ध लिखने का सर्वप्रथम प्रयास किया गया - कल्हण के द्वारा
Ø       कल्हण द्वारा रचित पुस्तक - राजतरंगिणी (जिसका सम्बन्ध - कश्मीर के इतिहास से है)
Ø       अष्टाध्यायी के (संस्कृत भाषा व्याकरण की प्रथम पुस्तक) लेखक है - पाणिनी
Ø       अरबो की सिंध विजय का वृतांत सुरक्षित है - चचनामा (लेखक- अली अहमद) में
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