राजस्थान के भौगोलिक प्रदेश


राजस्थान के भौगोलिक प्रदेश
भौगोलिक प्रदेश से तात्पर्य उन विशिष्ट क्षेत्रो से है जिनका निर्धारण भौगोलिक तत्वो के आधार पर किया जाता है। ये वे प्रदेश होते है ,जिनमे उच्चावच, जलवायु, प्राकृतिक वनस्पति, मृदा मे पर्याप्त एकरूपता दृष्टिगत होती है। इस प्रकार की समता या एकरूपता के कारण यहाँ के आर्थिक एवं सामाजिक स्वरूप मे भी सामान्यतया समानता देखी जाती है। यद्यपि प्रत्येक क्षेत्र अपने समीपस्थ भाग से भिन्न होता है, किन्तु उनमे एक आन्तरिक एकरूपता अन्तर्निहित होती है। यही एकरूपता प्रदेशो की पहचान होती है। प्रत्येक प्रदेश की भौगोलिक विशिष्टताये उस प्रदेश के आर्थिक एवं सामाजिक स्वरूप को न केवल प्रभावित अपितु निर्धारित करती है। ये प्रदेश मात्र सैद्धान्तिक न होकर क्षेत्रीय विकास का आधार प्रस्तुत करते है तथा क्षेत्रीय नियोजन का मार्ग प्रशस्त करते है।
राजस्थान एक ऐसा राज्य है जहाँ अत्यधिक भौगोलिक विविधतायें यहाँ के न केवल विकास को प्रभावित करती है, अपितु सदियो से यहाँ के जन-जीवन मे विविधता के साथ एकता का सूत्रपात करती रही है। राजस्थान के मध्य में अरावली पर्वत श्रेणियो का विस्तार है, तो पश्चिम मे विशाल मरूप्रदेश है। पूर्वी राजस्थान का मैदानी क्षेत्र और दक्षिण-पूर्व का पठारी क्षेत्र अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। अतः इन प्रदेशो का अध्ययन यहाँ के प्राकृतिक, आर्थिक एवं सामाजिक स्वरूप को समझने के लिये आवश्यक है, क्योकि इसी के माध्यम से हम यहाँ की समृद्ध संस्कृति को समझ सकते है तथा विकास की योजनाओ को नई दिशा दे सकते है।

 राजस्थान के भौगोलिक प्रदेशो का निर्धारण सर्वप्रथम प्रो. वी.सी.मिश्रा ने राजस्थान का भूगोल पुस्तक मे किया जिसका प्रकाशन नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा 1968 में किया गया। उन्होने राजस्थान को सात भौगोलिक प्रदेशो मे विभक्त किया, जो निम्न तालिका मे प्रदर्शित है-

प्रो.वी.सी.मिश्रा द्वारा प्रस्तावित भौगोलिक प्रदेश

1 पश्चिमी शुष्क प्रदेश  शुष्क रेगिस्तानी मैदान, वार्षिक वर्षा 15 से 25 से.मी. जैसेलमेर, बाड़मेर, द.पू. बीकानेर, पश्चिमी जौधपुर, द.प.चूरू तथा पश्चिमी नागौर 
2 अर्द्ध-शुष्क प्रदेश   अरावली के पश्चिम का शुष्क प्रदेश, वार्षिक वर्षा 25 जालौर, पाली, नागौर, झुझुनू, उ.पू.चूरू व द.पू. जौधपुर 2 से 50 सेमी.
3 नहरी क्षेत्र   सिंचित  रेगिस्तानी  मैदान, वार्षिक वर्षा 15 से 25 से.मी. गंगानगर, पश्चिमी बीकानेर और उत्तरी जैसेलमेर 
4 अरावली प्रदेश   अरावली  की  पहाड़ियाँ, वार्षिक वर्षा 30 से 60 सेमी. उदयपुर, द.पू. पाली व पश्चिमी डूँगरपुर 
5 पूर्वी कृषि - औद्योगिक प्रदेश  मैदानी व पठारी अर्द्ध शुष्क प्रदेश वार्षिक वर्षा 50 सेमी से अधिक  जयपुर, अजमेर, सवाई माधोपुर, भीलवाड़ा, बून्दी, अलवर, भरतपुर, धौलपुर और कोटा शहर
6. दक्षिणी-पूर्वी कृर्षि प्रदेश  विन्ध्यन व लावा पठार, वर्षिक वर्षा 50 सेमी से अधिक  पूर्वी डूँगरपुर, बाँसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, कोटा, झालावाड़
7 चम्बल बीहड़ प्रदेश  चम्बल के बीहड़, वार्षिक वर्षा 50 से.मी. से अधिक  सवाई माधोपुर और जोधपुर 

इसी प्रकार प्रो.राम लोचन सिंह ने 1971 मे भारत का प्रादेशीकरण करते हुए राजस्थान को दो वृहत प्रदेशो यथा राजस्थान और राजस्थान पठार मे विभक्त कर इनके चार उप-प्रदेश और 12 लघु प्रदेशो मे विभक्त कर उनका विवरण प्रस्तुत किया। एक अन्य विभाजन प्रो. तिवारी और सक्सेना ने राजस्थान का प्रादेषिक भूगोल पुस्तक मे 1994 मे प्रस्तुत किया। इसमें राजस्थान के धरातल, जलवायु, नदी-बेसिन आदि को आधार बनाकर उन्हे प्रशासनिक सीमाओं के साथ समन्वित कर राजस्थान के प्रमुख, गौण, तृतीयक एवं सूक्ष्म प्रदेशो का निर्धारण किया।
 उपर्युक्त प्रादेशिकरण की जटिलताओ मे न जाकर हम यहाँ राजस्थान के सामान्य भौगोलिक प्रदेशो का विवरण प्रस्तुत कर रहे है जो राज्य के भौगोलिक, आर्थिक एवं जनसंख्यकीय को तो स्पष्ट करते ही है साथ में विकास की आधारशिला भी है। सामान्यतया राजस्थान को चार भौगोलिक प्रदेशो मे विभक्त किया जाता है

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