राजस्थान का अरावली प्रदेश


अरावली प्रदेश
 भौगोलिक दृष्टि से अरावली राजस्थान का विशिष्ट प्रदेश है जिसे पर्वतीय प्रदेश भी कहा जा सकता है क्योंकि यहाँ अरावली पर्वत शृखलाएँ विस्तृत है। राज्य के मध्य में कर्णवत् दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर विस्तृत अरावली पर्वत श्रेणी विश्व की प्राचीनतम पर्वत श्रेणियों में से है। अरावली की पहाडियों ने राजस्थान को जहाँ एक ओर प्राकृतिक विशिष्टता प्रदान की है, वहीं दूसरी ओर यहाँ के आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास को भी प्रभावित किया है। इसके अन्तर्गत राजस्थान के सिरोही, उदयपुर, राजसमन्द, अजमेर, जयपुर, दौसा, अलवर, जिले मुख्यतया सम्मिलित है। किन्तु इनकी शाखाओं एवं प्रभाव को दृष्टिगत रखते हुए इसमें डूँगरपुर, बाँसवाड़ा, चित्तौड़गढ़ तथा भीलवाड़ा जिले भी सम्मिलित कर लिए जाते है। सीकर और झुंझुनूँ जिले की कुछ तहसीलें भी इसमें सम्मिलित की जाती हैं। यह सम्पूर्ण प्रदेश मात्र एक भौगोलिक प्रदेश ही नहीं अपितु एक योजना प्रदेश है। जिसके विकास हेतु विशिष्ट प्रयास किये जा रहे है।

प्राकृतिक स्वरूप
 भू-आकृतिकी की दृष्टि से अरावली श्रेणियाँ भारत में विशिष्ट है। अरावली श्रेणियाँ गुजरात के मैदान से प्रारम्भ होकर देहली तक राजस्थान के मध्य से कर्णवत दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व तक लगभग 700 कि.मी. लम्बाई में फैली हुई है। भूगार्भिक संरचना की दृष्टि से अरावली श्रेणियाँ प्री-केम्ब्रियन शैलों से सम्बन्धित हैं जिन्हें देहली क्रम और अरावली क्रम के अन्तर्गत वर्णित किया जाता है। अरावली श्रेणियों को तीन प्रमुख उप-प्रदेशों में विभक्त किया जाता है-

(अ)  दक्षिणी अरावली प्रदेश
 (ब) मध्य अरावली प्रदेश
 (स) उत्तरी अरावली प्रदेश
(अ) दक्षिणी अरावली

  दक्षिणी अरावली क्षेत्र वास्तव में मुख्य अरावली है। इस भाग में पर्वत श्रेणियों का विस्तार 100 किमी. चौड़ाई तक हो गया है तथा औसत ऊँचाई 1000 मीटर है। इस क्षेत्र में 8 से 10 श्रेणियों का समानान्तर विस्तार है। दक्षिणी अरावली क्षेत्र ऊँचाई में कम होते जाते हैं तथा वे डूँगरपुर, बाँसवाड़ा और पूर्वी ईडर की पहाड़ियों में बदल जाते हैं। माउण्ट आबू के क्षेत्र में पर्वत श्रेणियाँ सघन हैं, यहीं पर अरावली का सर्वो च्च शिखर गुरु शिखर है जिसकी ऊँचाई समुद्र तल से 1722 मीटर है। यहाँ की अन्य श्रेणियाँ सेर (1597मीटर), अचलगढ़ (1380मीटर)देलवाड़ा (1442 मीटर) और आबू (1225मीटर) हैं। उदयपुर-राजसमन्द क्षेत्र में सर्वो च्च शिखर जरगा पर्वतइ है, जिसकी ऊँचाई 1431मीटर है। यहाँ की अन्य श्रेणियाँ  कुम्भलगढ़, लीलागढ़, नागपानी, कमलानाथ की पहाड़ी, सज्जनगढ़ आदि है। नक्की झील माउण्ट आबू पर स्थित प्राकृतिक झील है। उदयपुर के निकट भी पिछोला, फतह सागर, जयसमन्द झीले हैं। इन श्रेणियों में ग्रेनाइट की प्रधानता के साथ-साथ देहली और अरावली क्वार्टजाइट भी प्रधानता से हैं। इस प्रदेश का अपवाह तन्त्र समानान्तर और दक्षिणवर्ती है जो बनास, साबरमती, पामरी, बाखल नदियों द्वारा तथा दक्षिण-पूर्व में गोमती और सोम नदियाँ हैं।

(ब) मध्य अरावली
  मध्य अरावली का विस्तार उदयपुर, राजसमन्द और अजमेर जिलों में है। इस क्षेत्र में पहाड़ियो की औसत ऊँचाई 700 मीटर है किन्तु घाटियों 550 मीटर ऊँची है। ये श्रेणियाँ लगभग 30 किमी. चौड़ी और 100 किमी. तक विस्तृत है। अजमेर के निकट  तारागढ़ की ऊँचाई 870मीटर है और पश्चिम में सर्पिलाकार पर्वत श्रेणियाँ नाग पहाड़ (795मीटर) है। इस भाग में अरावली की औसत ऊँचाई 700 मीटर है। अजमेर और नसीराबाद के मध्य की श्रेणियाँ जल विभाजक का कार्य करती है। ब्यावर तहसील के चार दर्रे  बार, पखेरिया, शिवपुर घाट तथा सुरा घाट है।

(स) उत्तरी अरावली
  उत्तरी अरावली का विस्तार साँभर से उत्तर-पूर्व को है। इसमें शेखावटी की पहाड़ियाँ, तोरावाटी की पहाड़ियाँ तथा जयपुर और अलवर की पहाड़ियाँ सम्मिलित हैं। इस क्षेत्र की समस्त श्रेणियाँ अपरदित है। प्रमुख पर्वत श्रेणियाँ  जयगढ़ (648मीटर)नाहरगढ़ (599मीटर)भानगढ़ (649मीटर), सिरावास (651मीटर), अलवर किला (597मीटर) हैं। बाणगंगा, धुन्ध और बाँडी नदियाँ प्रमुख हैं जो बनास नदी की सहायक है।

जलवायु
अरावली प्रदेश की जलवायु अति विशिष्ट है, इसके एक ओर शुष्क मरूस्थल है तो दूसरी ओर वर्षा युक्त प्रदेश। इसी कारण इसके पश्चिमी भाग में शुष्क जलवायु है तो पूर्वी भाग में आर्द्र जलवायु। ऊँचाई का प्रभाव भी जलवायु पर है। यद्यपि अरावली पर्वत शृंखला अधिक ऊँचाई की नहीं है किन्तु माउण्ट आबू ग्रीष्म में भी सुहावने मौसम के कारण पर्यअकों का केन्द्र है। तापमान दक्षिणी अरावली, मध्य अरावली एवं उत्तरी अरावली में भिन्नता रखता है। यहाँ ग्रीष्म में 280 से 340 से.ग्र. और शीतऋतु में 100 से 160 से.ग्रे. के मध्य रहता है। प्रदेश के दक्षिणी भागों में 100 से 150 से.मी. वर्षा होती है, जबकि मध्य एवं उत्तरी भाग 40 से 80 सेमी. तक।

प्राकृतिक वनस्पति - को अरावली पर्वत माला प्रश्रय दे रही है किन्तु दुर्भाग्य से विगत कुछ वर्षा में हुई अन्धाधुन्ध वृक्षों की कटाई से अब अनेक श्रेणियाँ वृक्ष विहीन हो गई हैं इस प्रदेश में उष्ण कटिबन्धीय वन हैं जिनमें धोकड़ा, बरगद, गूलर, खैर, आम, जामुन, बाँस, धाऊ, सिरिस, बेल,रोहिड़ा आदि के वृक्ष पाये जाते है। वर्तमान मे सिरोही जिले का आबू पर्वत क्षेत्र पर्याप्त सघन वनस्पति से युक्त है।

मृदा - की विविधता इस प्रदेश में अत्यधिक है। यहाँ भूरी-रेतीली कछारी मिट्टी अलवर क्षेत्र में है, तो जयपुर-मालपुरा क्षेत्र में कछ्छारी मिट्टी है। लाल-पीली मिट्टी का क्षेत्र अजमेर, पश्चिमी भीलवाड़ा, पश्चिमी उदयपुर और सिरोही है, जबकि डूंगरपुर, बांसवाड़ा में लाल लौमी मृदा की प्रधानता है। मिश्रित लाल-काली मृदा बाँसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा और उदयपुर जिलों के कुछ भागों में है। पर्वतीय ढालों पर मृदा नगण्य है किन्तु निचले ढाल तथा घाटियों में उपजाऊ मिट्टी होने से कृषि की दृष्टि से उत्तम है। इसी कारण पर्वतीय प्रदेश होते हुए भी यहाँ के अनेक क्षेत्र उत्तम कृषि क्षेत्र है।

आर्थिक प्रारूप
कृषि - यद्यपि अरावली प्रदेश की अधिकांश भूमि पहाड़ी है किन्तु फिर भी यहाँ के 44 प्रतिशत भू-भाग पर कृषि की जाती है। अरावली पर्वत माला का विस्तार सीमित है, ऊँचाई कम है तथा शृंखलायें अनवरत नहींहै और उनमे अनेक घाटियाँ और पर्वतपदीय मैदान है। अलवर, जयपुर, दौसा क्षेत्र में गेहूँ, चना, बाजरा, तिलहन एवं दालों की कृषि होती है। अजमेर में ज्वार, गेहूँ और तिलहन तथा उदयुपर, भीलवाड़ा में मक्का, गेहूँ, तिलहन की प्रधानता है। इसके साथ गन्ना, जौ, मूंगफली, तम्बाकू, सरसों, चना, कपास आदि की कृषि भी की जाती है। माही डेम के बन जाने से बांसवाड़ा के विस्तृत क्षेत्र में गेहूँ, गन्ना, कपास, मूँगफली आदि की खेती की जाती है। दक्षिणी अरावली क्षेत्र में अधिक वर्षा होने से अनेक स्थानो पर चावल भी उत्पादित होता है। प्रदेश में सिंचाई का मुख्य साधन कुआं है। यहाँ जल स्तर 10 से 15 मीटर के मध्य होता है। इसी के साथ नलकूपों का प्रयोग भी होने लगा है। माही, जाखम, औराई, अड़वान सिंचाई योजनाओं से सिंचाई क्षेत्र में पर्याप्त वृद्धि हुई है।

खनिज संसाधनों की दृष्टि से अरावली प्रदेश राजस्थान का सर्वाधिक सम्पन्न क्षेत्र है क्योंकि यह प्राचीन शैलों वाला प्रदेश है जो अनेक प्रकार के धात्विक एवं बहुमूल्य अधात्विक खनिजों से युक्त है। राज्य के वर्तमान खनिज उत्पादनों का लगभग 70 प्रतिशत इसी प्रदेश में होता है। यहाँ उपलब्ध खनिजों में सीसा-जस्ता, लौह अयस्क, बेरिलियम, ताँबा, अभ्रक, पन्ना, मैंगनीज, एस्बेस्टॉस, संगमरमर, ग्रेनाइट आदि प्रमुख है। उदयपुर की जावर की खानें, राजपुरा-दरीबा, भीलवाड़ा की अगूचा, डूंगरपुर की धुधरा, मांडी में सीसा एवं जस्ता के भण्डार है। लोहा मोरीजा, बानोल, नीमला, डाबला-सिंघाला, नीम का थाना, नाथरा की पाल में उपलब्ध है। बेरीलियम उदयपुर, जयपुर, भीलवाड़ा के पुर में सीमित मात्रा में है। अभ्रक का विशाल भण्डार भीलवाड़ा, अजमेर और जयपुर जिलों में है। एस्बेस्टॉस उदयपुर, डूंगरपुर और अजमेर जिलों में उत्पादित होता है। मैंगनीज बांसवाड़ा और उदयपुर में उपलब्ध है। पन्ना काला गुमान, हिरवी और गोगुन्दा (उदयपुर में) तथा बेराइट्स अलवर में है। सम्पूर्ण अरावली में भवन निर्माण हेतु उत्तम प्रकार का पत्थर मिलता है किन्तु यदि इसकी अनियन्त्रित खुदाई होती रही तो अनेक पहाड़ियों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जायेगा। इस प्रदेश में उपलब्ध अन्य खनिजों में फेल्सपार, काँच बालूका, चीनी मिट्टी, डोलोमाइट, यूरेनियम, तामड़ा, चूने का पत्थर, स्लेट आदि हैं। कहा जा सकता है कि अरावली प्रदेश खनिजों की दृष्टि से एक समृद्ध प्रदेश है।

उद्योगों का विकास इस प्रदेश में पर्याप्त हुआ है क्योंकि यहाँ औद्योगिक कच्चा माल उपलब्ध है, ऊर्जा जल के साथ-साथ विपणन हेतु बाजार भी राज्य में और राज्य से बाहर है। इस प्रदेश में अनेक औद्योगिक क्षेत्र है जिनमें प्रमुख है- अलवर, भिवाड़ी, जयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा एवं उदयपुर। इसके अतिरिक्त ब्यावर, मकराना, फुलेरा, किशनगढ़, चित्तौड़गढ़, सांभर, सीकर, निम्बाहेडा, भूपाल सागर आदि नगर भी कतिपय उद्योगों हेतु प्रसिद्ध है। अलवर क्षेत्र में सिन्थेटिक फाइबर रसायन, स्टील, स्कूटर, वनस्पति तेल, दाल मिल आदि विकसित हुए है। भिवाड़ी को राज्य सरकार ने विशेष रूप से औद्योगिक केन्द्र की स्थापना हेतु चुना है। जयपुर औद्योगिक क्षेत्र में इंजीनियरिंग, विद्युत यन्त्र, मीटर, स्पिनिंग और वीविंग मिल, बाल-बियरिंग उद्योग आदि का विकास हुआ है। अजमेर में हिन्दुस्तान मशीन टूल्स, रेलवे वर्कशॉप के अतिरिक्त अनेक मध्यम श्रेणी के उद्योग है। भीलवाड़ा राज्य का प्रमुख औद्योगिक केन्द्र बनता जा रहा है। यहाँ सूती वस्त्र, होजरी, सिन्थेटिक फाइबर, वनस्पति घी, दाल मिल, ऊनी वस्त्र आदि के कारखाने है।

चित्तौड़गढ़ और निम्बाहेड़ा में सीमेन्ट के कारखानें, भूपाल सागर में चीनी मिल है। उदयपुर में औद्योगिक क्षेत्र में कपास कताई, रसायन डिस्टलरी, मशीन उद्योग आदि विकसित हुए है। देबारी स्थित जिंक स्मेल्टर न केवल राज्य अपितु भारत का एक प्रमुख प्लान्ट है। स्पष्ट है कि इस प्रदेश में औद्योगिक विकास तीव्र गति से हो रहा है और भविष्य में इसके और अधिक विकसित होने की सम्भावना है।

परिवहन का विकास अरावली प्रदेश में अच्छा हुआ है। यद्यपि पर्वतीय प्रदेश है किन्तु इसकी राज्य में मध्यवर्ती स्थिति के कारण यहाँ रेल एवं सड़क परिवहन की सुविधा पर्याप्त है। अलवर, जयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा, उदयपुर, ब्यावर, फुलेरा, दौसा, डूंगरपुर, चित्तौड़गढ़ आदि रेल मार्गों की सुविधा से युक्त है। राज्य की राजधानी होने से जयपुर रेल मार्ग से देहली, बम्बई, अहमदाबाद, आगरा और देश के अन्य प्रमुख नगरों तथा राज्य के अन्य भागों से जुड़ा है। अजमेर न केवल रेलमार्गों की सुविधा रखता है अपितु यहाँ का रेल वर्कशॉप महत्वपूर्ण है। सड़क परिवहन की यहाँ उत्तम सुविधा है। इस प्रदेश से राष्ट्रीय राज मार्ग नं. 8 जयपुर, अजमेर, राजसमंद, उदयपुर होता हुआ गुजरता है। राष्ट्रीय राजमार्ग 11 आगरा से दौसा, जयपुर, सीकर होता हुआ बीकानेर तक जाता है। अन्य प्रमुख मार्गों में अजमेर - कोटा, जयपुर - अलवर, जयपुर - कोटा, जयपुर - अजमेर - भीलवाड़ा - चित्तौड़गढ़ - उदयपुर आदि के अतिरिक्त प्रत्येक जिले में सड़क मार्गों का पर्याप्त विकास हुआ है। जयपुर और उदयपुर में नियमित वायु 13सेवा है। जयपुर का हवाईअड्डा अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का है। यहाँ से देहली, जोधपुर, उदयपुर, बम्बई को नियमित सेवा है। जयपुर तथा उदयपुर विदेशी पर्यअकों के केन्द्र है।

जनसंख्या
  अरावली प्रदेश यद्यपि पर्वतीय है किन्तु पर्वतीय विस्तार सीमित चौड़ाई में होने के कारण इसमें सम्मलित अनेक जिलें सघन जनसंख्या को प्रश्रय देने हैं। इस प्रदेश में सर्वाधिक जनसंख्या 2001 में जयपुर जिले की रही, जो 52.52लाख अंकित की गई। इसके पश्चात् अलवर जिले की 29.90 लाख, अजमेर जिले की 21.80 लाख, तथा भीलवाड़ा जिले की 20.09 लाख रही। उस प्रदेश में सबसे कब जनसंख्या वाला जिला वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार सिरोही था, जिसकी जनसंख्या 8.50 लाख अंकित की गई।
 जयपुर जिले में वर्ष 2001 में जनसंख्या घनत्व 471 रहा, जबकि अलवर जिले में 357  और अजमेर जिले में 257 व्यक्ति प्रतिवर्ग किलोमीटर रहा। दौसा जिला में 384, सिरोही और चित्तौड़गढ़ जिलों में जनसंख्या घनत्व 166 व्यक्ति प्रतिवर्ग अंकित किया गया। अरावली प्रदेश में सम्मलित कुछ जिलों में अनुसूचित जनजाति की बहुलता है। बाँसवाड़ा और डूँगरपुर में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या का प्रतिशत वर्ष 2001 में क्रमशः 73.47 एवं  65.84 प्रतिशत है, उदयपुर में यह प्रतिशत 36.79, सिरोही में 23.39 और चित्तौड़गढ़ में 20.28 प्रतिशत है। जयपुर इस प्रदेश का ही नहीं अपितु राजस्थान का सबसे बड़ा नगर है जिसकी जनसंख्या 2001 में 2,324,319 अंकित की गई। अन्य प्रमुख नगर अजमेर, उदयपुर, अलवरभीलवाड़ा, ब्यावर, दौसा, किशनगढ़, नसीराबाद, नाथद्वारा, प्रतापगढ़, डूँगरपुर, बाँसवाड़ा है।
  उपर्युक्त विवरण से स्पष्ट है कि अरावली प्रदेश राजस्थान का न केवल एक विशिष्ट भौगोलिक प्रदेश है, अपितु एक आर्थिक प्रदेश है। इस प्रदेश में खनिज, अरावली प्रदेश में विकास की गति अच्छी रही है वही दक्षिणी अरावली का आदिवासी प्रदेश अपेक्षाकृत कम विकसित हुआ है, जिसकी ओर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है जिससे प्रादेशिक असमानता में कमी आ सके।
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