राजस्थान में पशुपालन


राजस्थान में पशुपालन

गाय की सर्वश्रेष्ट नस्ल राठी
भेड़ की सर्वश्रेष्ट नस्ल चोकला
ऊंट की सर्वश्रेष्ट नस्ल नाचना (जैसलमेर)
भार ढोने के लिए उपयुक्त ऊंट की नस्ल बीकानेरी
सवारी के लिए ऊंट की सर्वश्रेष्ट नस्ल गोमठ (जोधपुर)
भैंस की सर्वश्रेष्ट नस्ल मुर्रा
सर्वाधिक ऊन देने वाली भेड़ की नस्ल जैसलमेरी
बकरी की सर्वश्रेष्ट नस्ल जखराना

गाय
१.       नागौरी बैल उत्पत्ति का क्षेत्र सोहालक ग्राम (नागौर), चुस्त और फुर्तीले बैल.
२.      राठी गाय नस्ल सिन्धी + साहीवाल. दूध व्यवसाय के लिए, (जैसलमेर, बीकानेर, श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ जिलो में पाई जाती है)
३.      थारपारकर उत्पत्ति स्थान मालणी प्रदेश (जैसलमेर)
४.     कांकरेज बाड़मेर, पाली, सिरोही, जालौर जिलो में पाई जाती है.
५.     मालवी उत्पत्ति क्षेत्र मालवी प्रदेश (झालावाड)
६.      मेवाती अलवर का पूर्वी भाग और भरतपुर जिलो में पाई जाती है.
७.     हरियाणा श्रीगंगानगर, अलवर, सीकर, झुंझुनू व जयपुर जिलो में रहती है.
८.      गिर भीलवाड़ा, अजमेर, और पाली. इसे गुजरात में गिर और राजस्थान में रेंडा तथा अजमेरा के नाम से जाना जाता है.
९.      सांचोरी जालौर जिले के सांचोर इलाके में पाए जाते है.

गाय बीमा

1. कामधेनु बीमा योजना 
 प्रदेश की बहुमूल्य गायों के हितार्थ उनका बीमा करवाये जाने से जोखिम की पूर्ति हे तु
जनरल इश्योरंेस कम्पनी द्वारा राजकीय अनुदानित बीमा योजना 
 गाय की कीमत का 4 प्रतिशत प्रीमियम, जिसका 50 प्रतिशत अनुदान पशुपालन विभाग
द्वारा देय है।
 रोग एवं दुर्घटना से बीमित गाय की मृत्यु अथवा पूर्ण विकलांगता पर 100 प्रतिषत
2. गौपालक बीमा योजना
 गौ़पालकों की दुर्घटना/ विकलांगता अथवा मृत्यु की स्थिति में उनके परिवार को बीमा
क्ले म की राशि उपलब्ध करवाना।
 कुल प्रीमियम 200 रू. जिसमें से 100 रू. का भुगतान केन्द्र सरकार की सामाजिक
सुरक्षा निधि द्वारा तथा शे ष 100/- में से 25/- का पशुपालन विभाग द्वारा अनुदान ।
शे ष रू. 75/- गौपालक द्वारा देय।
 अतिरिक्त लाभ- शिक्षा हेतु अधिकतम दो बच्चों (कक्षा-9 से 12 के बीच पढ़ने वाले ) को
100/- मासिक छात्रवृत्ति।
 मृत्यु पर बीमा सुरक्षा लाभ - रू. 30,000/-, दुर्घटना से मृत्यु पर - रू. 75,000/-
 दुर्घटना से पूर्ण विकलांगता- रू. 75,000/-, आंषिक विकलांगता - रू. 37,500/-
3. गौरक्षक बीमा योजना 
 गौपालक की दुर्घटना, विकलांगता अथवा दुर्घटना में मृत्यु की स्थिति में उनके परिवार
को बीमा क्लेम राशि उपलब्ध करवाना।
 कुल प्रीमियम रू.60/- मे ं से रू. 20/- का पशुपालन विभाग द्वारा अनुदान        
(33 प्रतिषत)।
 बीमा सुरक्षा लाभ रू. 1,00,000/-, दुर्घटना से मृत्यु पर - रू.1,00,000/-
 दुर्घटना से पूर्ण विकलांगता- रू.1,00,000/-, आंषिक विकलांगता - रू. 50000/-

भैंस
१.       भैंस की प्रमुख नस्लों में मुर्रा, मेहसाना, जाफराबादी, नीली, सूरती, भदवारी,राबी और पंडरपुरी है.
२.      मुर्रा नस्ल की भैंस भारत में दूध उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है.( अपने दुग्ध काल में यानि की एक वर्ष में १८०० से २८०० किलो तक दूध देती है.)
३.      जयपुर में राजस्थान की सर्वाधिक भैंसे पाई जाती है.
४.     भैंस फार्म बस्सी(जयपुर) और कुम्हेर(भरतपुर)
भैंस बीमा योजना
 प्रदेश के बहुमूल्य भैंसों के हितार्थ उनका बीमा करवाये जाने से जोखिम की पूर्ति हे तु
जनरल इश्योरंेस कम्पनी द्वारा राजकीय अनुदानित बीमा योजना 
 भैंस की कीमत का 4 प्रतिशत प्रीमियम, जिसका  50 प्रतिशत अनुदान पशुपालन विभाग
द्वारा देय है।
 रोग एवं दुर्घटना से बीमित भैंस की मृत्यु अथवा पूर्ण विकलांगता पर 100 प्रतिषत बीमा
भेड़
१.       राजस्थान में देश की १७ % भेड़े पाई जाती है.
२.      भारत का ऊन उत्पादन लगभग ४.४ करोड है (जिसमे राजस्थान का ४१% है भाग है.)
३.      यह ऊन मोटे किस्म का होने के कारण इसका उपयोग कम्बल और गलीचे बनाने के काम में ली जाती है.
४.     राज्य के प्रमुख भेड़ पालक जिले नागौर, पाली, जालौर, बीकानेर, बाड़मेर, जोधपुर, चुरू, श्रीगंगानगर, भीलवाड़ा, जैसलमेर एवं हनुमानगढ़ है.
५.     सर्वाधिक भेड़ का स्थान जोधपुर तथा सबसे कम धौलपुर
६.      भेडो की मुख्य नस्ले :-
.[चोकला इसको भारतीय मैरिनो भी कहते है यह नस्ल अधिक ऊन और अच्छे किस्म के ऊन के लिए जानी जाती है. बीकानेर, सीकर, चुरू एवं झुंझुनू जिलो में पाई जाती है. इनकी ऊन उत्तम व मुलायम होती है]

.[मारवाड़ी जोधपुर, जैसलमेर, पाली, नागौर, बाड़मेर, सिरोही, राजसमंद, अजमेर और उदयपुर जिलो में है. यह अच्छी रोग-निरोधक क्षमता तथा सर्वाधिक होने के कारण प्रचलित है.]

.[ नाली श्रीगंगानगर, हनुमागढ़, उत्तरी बीकानेर, तथा निकटवर्ती चुरू जिले में पाई जाने वाली इस नस्ल की भेड़ का ठिगना कद, चाकलेटी रंग का चेहरा, लम्बे कान एवं ३० से ३२ किलो वजन इसकी प्रमुख विशेषताएँ है.]

४. [जैसलमेरी जैसलमेर और जोधपुर में पाई जाने वाली इस नस्ल का भारी शरीर, काला और गहरा रंगवाला मुहँ तथा लम्बी पूंछ इस भेडो की खास पहचान है.]

.[मगरा जैसलमेर और पश्चिमी बीकानेर जिलो में पाई जाने वाली इनके अतिरिक्त नागौर, जोधपुर और पाली जिलो में भी पाई जाती है, इस नस्ल की पहचान है की इसके आँखों के चारो ओर भूरे रंग के दाग होते है]

.[मालपुरी टोंक के मालपुरा क्षेत्र के नाम की यह नस्ल मुख्यत: जयपुर, टोंक, सवाईमाधोपुर, अजमेर ओर पाली जिलो में पाई जाती है इसको मांस के लिए पला जाता है]
.[सोनाडी यह उदयपुर, बाँसवाडा, डूंगरपुर ओर चित्तौड़गढ़ जिलो में पाई जाती है. इस नस्ल की भेड़े सबसे भारी होती है ४५-५० किलो वजन होता है. इसे भी मांस के लिए पाला जाता है.]

.[पुगल यह नस्ल जैसलमेर ओर बीकानेर जिलो में पाई जाती है]

.[खेरी जोधपुर,पाली एवं नागौर में फिरने वाले रेवडो में पाई जाती है.]
भेड़ बीमा
1 अविका कवच 
 प्रदेश की बहुमूल्य भे ड़ों के हितार्थ उनका बीमा करवाये जाने से जोखिम की पूर्ति हेतु
जनरल इश्योरेस कम्पनी द्वारा राजकीय अनुदानित बीमा योजना
 भे ड़ की कीमत का 5 प्रतिशत प्रीमियम, जिसका 25 प्र तिशत अनुदान
 रोग एवं दुर्घटना से भेड़ की मृत्यु अथवा पूर्ण विकलांगता पर उसकी कीमत का 100 प्रतिषत बीमा लाभ ।
2. अविकापाल जीवन रक्षक
 भे ड़पालकों की दुर्घटना/ विकलांगता अथवा मृत्यु की स्थिति मे उनके परिवार को बीमा क्लेम की राशि उपलब्ध करवाना।
 कुल प्रीमियम 200 रू., जिसमें से 100 रू. का भुगतान केन्द्र सरकार की सामाजिक
सुरक्षा निधि द्वारा तथा शेष 100/- में से 25/- का पशुपालन विभाग द्वारा अनु दान।
 बीमा सुरक्षा लाभ 30,000/-
 अतिरिक्त लाभ- शिक्षा हेतु अधिकतम दो बच्चों (कक्षा-9 से 12 के बीच पढ़ने वाले ) को 100/- मासिक छात्रवृत्ति।
 मृत्यु पर बीमा सुरक्षा लाभ - रू. 30,000/-
 दुर्घटना से मृत्यु पर - रू. 75,000/-
 दुर्घटना से पूर्ण विकलांगता- रू. 75,000/-
 आंषिक विकलांगता - रू. 37,500/-
3. अविरक्षक बीमा योजना 
 भे ड़पालक की दुर्घटना, विकलांगता अथवा दुर्घटना में मृत्यु की स्थिति में उनके परिवार को बीमा क्लेम राशि उपलब्ध करवाना।
 कुल प्रीमियम रू.15/- में से रू. 5/- का पशुपालन विभाग द्वारा अनुदान          
(33 प्रतिषत)। 
 बीमा सुरक्षा लाभ रू. 25,000/- (अधिकतम 1.00लाख रू.)

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