ब्रह्माण्ड( The Universe)


ब्रह्माण्ड( Universe)


पृथ्वी के उपर विस्तृत असीम आकाश को अंतरिक्ष कहते है. इसका न कोई आदि है, और न कोई इसका अंत है. इसी में विश्व व्याप्त है. विश्व की कोई निश्चित सीमा नहीं है, इसलिए पौराणिक धर्मग्रंथो में इसे ‘अनन्त ब्रह्मांड’ कहा गया है. रात्रि में हमें आकाश में टिमटिमाते अनगिनत तारे दिखाई देते है, इनमें तारे, नक्षत्र, ग्रह, उपग्रह, निहारिका, उल्का, धूमकेतु आदि अनेक प्रकार के ठोस एवं गैसमय पिंड सम्मिलित है जिन्हें आकाशीय पिंड कहा जाता है. ये सभी पिंड गतिशील है तथा अपने निश्चित मार्गों पर परिभ्रमण करते है. प्रत्येक पिण्ड गुरूत्वाकर्षण के कारण शून्य में टिका हुआ है. केवल अपवाद के तौर पर ही कभी-कभी कोई तारा अपने मार्ग से भटकर दूसरे तारे से टकरा जाता है.
आकाशीय पिंडों के आकार, स्वरूप, गुण, प्रकाश, गति एवं दुरी में बहुत अंतर होता है. उनकी परस्पर दूरियां इतनी अधिक है की उनकी दुरी को किलोमीटर या मिल में नहीं नापा जा सकता है. अत: आकाशीय दूरियों को नापने के लिए प्रकाश वर्ष का प्रयोग किया जाता है. प्रकाश की किरण प्रति सेकंड में तीन लाख किमी दुरी (3 x 1010 सेमी) तय करती है. अत: एक प्रकाश वर्ष (9.46 x 1015 मीटर) लगभग 9500 अरब किमी दूरी के बराबर है. [3.26 प्रकाश वर्ष की दूरी पारसेक कहलाती है जो लगभग 30000 अरब किमी की दूरी है] सूर्य के अतिरिक्त पृथ्वी का निकटतम तारा प्रॉक्सिमा सेन्टौरी [proxima centauri] लगभग 4.22 की दूरी पर स्थित है.एंड्रोमीडा [ andromeda] नामक निहारिका पृथ्वी से 9 लाख प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है . इससे ब्रह्मांड के विस्तार का अनुमान लगाया जा सकता है. एम्पिलन ऑरिगे नामक तारा सूर्य से 270 करोड गुना बड़ा है इससे ब्रह्मांड की विशालता का बोध होता है.

उत्पति-
ब्रह्माण्ड की उत्पति के संबंध में अंतरिक्ष विज्ञानियों ने कई मत दिये है. इनमें सबसे महत्वपुर्ण महाविस्फोट  [big bang] सिद्धांत है. इसे सर्वप्रथम आर. एल्फर, गोमेगो तथा आर. हरमैन नामक अंतरिक्ष विज्ञानियों ने 1948 में प्रतिपादित किया. इस सिद्धांत जे अनुसार 15 से 20 अरब वर्ष पुर्व ब्रह्माण्ड का सम्पुर्ण द्र्‌व्य संघनित एंव उच्च ताप वाला था. एक बड़े विस्फोट के बाद यह कई खण्ड में विभाजित हो गया. तब से इसका लगातार विस्तार हो रहा है. ब्रह्माण्ड में फैली आकाशगंगाएं, तारे व अन्य पिण्ड उसी विस्फोट से बने है.
ब्रह्माण्ड को हम यह कहते हुये परिभाषित कर सकते है कि यह संपुर्ण अंतरिक्ष, यह संपुर्ण अंतरिक्ष, उसमें स्थित द्रव्य एवं उर्जा का समग्र रुप है. ब्रह्माण्ड के विस्तार का हम इस तथ्य से अनुमान लगा सकते है कि सुर्य हमारी आकाशगंगा के लगभग 4 खरब तारों में से एक औसत किस्म का तारा है. हमारी आकाशगंगा ब्रह्माण्ड की लगभग 1 खरब आकाशगंगाओं में से एक औसत आकार की आकाशगंगा है. ब्रह्माण्ड का अनुमानित विस्तार लगभग 20 अरब प्रकाश वर्ष है ब्रह्माण्ड का कोई केन्द्र नहीं होता है.



बिग बैंग थ्यौरी क्या है?
बिग बैंग या ज़ोरदार धमाका, ब्रह्मांड की रचना का एक वैज्ञानिक सिद्धांत है. यह इस सवाल का जवाब देने की कोशिश करता है कि यह ब्रह्मांड कब और कैसे बना. इस सिद्धांत के अनुसार, कोई 15 अरब वर्ष पहले समस्त भौतिक तत्व और ऊर्जा एक बिंदु में सिमटी हुई थी. इससे पहले क्या था, यह कोई नहीं जानता. फिर इस बिंदू ने फैलना शुरू किया. बिग बैंग, बम विस्फोट जैसा विस्फोट नहीं था बल्कि इसमें, प्रारंभिक ब्रह्मांड के कण, समूचे अंतरिक्ष में फैल गए और एक दूसरे से दूर भागने लगे. इस सिद्धांत का श्रेय ऐडविन हबल नामक वैज्ञानिक को जाता है जिन्होंने कहा था कि ब्रह्मांड का निरंतर विस्तार हो रहा है. जिसका मतलब ये हुआ कि ब्रह्मांड कभी सघन रहा होगा. 





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